Press enter to see results or esc to cancel.

Blog image
 Sunday, December 14, 2014

Democracy Shibir

हमारे अरिहंत परमात्मा ने लाखों साल पहले यह व्यवस्था कानिर्माण किया था, जिसके बारे मैं हमारे जिन आगमो मैं बड़े ही विस्तार से बताया गयाहै.

हमारे परमात्मा ने हर एक जीव के लिए करुणा और दया थी और उनकाफार्मूला इतना गजब का है की इसमें पूरा ब्रह्माण्ड कवर हो जाता है. उनके logicsइतने पावरफुल थे जिसके सहारे इंसान अपने आप को तेजोमय और परमसुख को पाने वाला बनासकता है.

 

इंग्लिश मैं हम जिसे डेमोक्रेसी कहते हैं, हिंदी मैं हमजिसे लोकतंत्र कहता हैं. जिन्साशन मैं हम उसे धर्मं कहते हैं


जिस तरह फाउंडेशन डाला जाता है एक माकन को बनाने के लिए,चाहे वोह माकन छोटो से एक मंजिल मकान हो यह बड़ी ५० मेल की बिल्डिंग नीव के बेगारवह मकान खड़ा नहीं रह सकता.

 

ठीक उसी तरह हमारी आत्मा मैं धर्मं का रोपण अगर नो हो तोइंसान जाहे वोह गरीब या आमिर उसका पतन हो जाता है. उसकी कोई जरुरत समाज को नहींरहती. जी तरह हम किसी खुनी यह दरिन्दे को देखते हैं तो हम सब सोचते हैं की इसकोपुलिस पकड़ कर जेल कर दे या फिर सोचते हैं यह मर क्यूँ नहीं जाता. आवेश मैं हम ऐसाभी सोच लेते हैं क्यूंकि वोह कई लोगों को दुःख देता है.


करुणा करने के भव हमारे अन्दर होने चाहिए, आज हमारे कोईपूर्व के कोई पुण्य बल से हम मनुष्य अवतार मिला है, हमारे पास सकती है की हम अपनीजरुरत की चीज का ला सकें, लेकिन बिचारे तिर्यंच के जीव कितने लाचार होते हैं,उन्हें सब रस्ते की पड़े गंदी चीजो का आहार करना पड़ता है. हम अगर किसी कुते को दोबिस्कुट देते हैं या कबूतर को दाना डालते हैं या फिर गाय को चारा डालते हैं, तो हमजबरदस्त पुण्य का उरपाजन करते हैं, हमे किसीकी लाचारी देख उनपे करुणा आये और हमउसकी मदत करे तो कुदरत हमारे किये हुए कई कर्मो का नाश करती है और साथ मैं पुण्यका उरपाजन करती है जिससे हम अपने जीवन मैं सुखी बनते हैं. तो आप बताये की क्याप्रभु का बताया हुआ यह नियम और उसका यह इनाम गलत है ??


हमारे प्रभु भी हमारे तरह ही एक जीव थे जिन्होंने भी कई पापकर्मा उत्पन किये थे, और उन्होंने भी अपने पाप कर्मो को हल्का करने के लिए तपस्याकी थी, जिसके द्वारा उनके कई पापों की निर्जरा हो गयी थी. तो हमें भी यथा सकतीतपस्या करनी चाहिए ताकि हमारे सर से कर्मो का बोज थोडा कम हो.

 

Continue reading